जब हम बच्चे थे, तो मैं और मेरा भाई चुपके से मेंढकों को घर में लाकर उनके साथ खेलते थे, वो भी पूरी तरह से गुप्त रूप से और अपने माता-पिता को बिना बताए। एक समय तो हमने एक मेंढक को नन्ह-सी जान से लेकर पूरी तरह से वयस्क होने तक पाला भी था। हर सप्ताहांत हम अपनी दादी के घर पर रुकते थे, जो एक छोटी नदी के ठीक बगल में स्थित था, और रात को हम मेंढकों की मधुर टर्राहट सुनकर सो जाते थे। लेकिन मैं यह अवश्य कहूँगी कि SAVE THE FROGS! – एक संगठन जिसके बारे में मुझे 2011 में एक ऑनलाइन कविता प्रतियोगिता में भाग लेने के दौरान पता चला – की बदौलत मैं मेंढकों के बारे में कई अद्भुत तथ्य सीखती रहती हूँ, जिनसे न केवल मुझे इन नन्हे उछलने वाले जीवों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली है, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता, वैश्विक स्तर पर मानव जाति के अस्तित्व और विशेष रूप से मेरे उष्णकटिबंधीय द्वीप मॉरीशस में उनके महत्व को समझने और स्वीकार करने में भी मदद मिली है।.

जलीला हसनैली ने ' SAVE THE FROGS! ' लिखी हुई टी-शर्ट पहनी हुई है।.
मैं SAVE THE FROGS! का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे 2012 में मॉरीशस में पहला SAVE THE FROGS! कार्यक्रम आयोजित करने का अवसर दिया और तब से इस परियोजना के बारे में अपनी पूरी क्षमता से जागरूकता फैलाना मेरे लिए सम्मान की बात रही है। यह परियोजना मेरे दिल और आत्मा के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।.
जलीला हसनल्ली
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- मिस ह्यूमैनिटी होप (मॉरीशस) 2016
- मिस इंडिया वर्ल्डवाइड मॉरीशस 2016
- कालातीत मेंढक प्रेमी
फीनिक्स, मॉरीशस द्वीप


