SAVE THE FROGS! भारत
कविता प्रतियोगिता
प्रकृति के नन्हे गायकों को समर्पित एक कविता प्रतियोगिता
क्या आपको प्रकृति और वन्यजीवों से प्रेम है? क्या दलदली क्षेत्रों में गूंजती मेंढकों और टोडों की लयबद्ध आवाजें आपको प्रेरित करती हैं? SAVE THE FROGS! "दलदल की धुनें: सुर में उभयचर" विषय पर आधारित हमारी कविता प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आमंत्रित करता है । यह आपके लिए मेंढकों के लिए अपनी कविताएँ लिखने का अवसर है—उनके गीतों, आवासों, सुंदरता और अस्तित्व के लिए उनके सामने आने वाली चुनौतियों का जश्न मनाएं।
हम बदलाव लाने की प्रेरणा में कविता की शक्ति पर विश्वास करते हैं। चाहे आप छात्र हों, शिक्षक हों, लेखक हों, अभिभावक हों या प्रकृति प्रेमी हों, आपके शब्द जागरूकता बढ़ा सकते हैं, कार्रवाई को प्रेरित कर सकते हैं और मनुष्यों तथा उभयचरों के बीच संबंध को गहरा कर सकते हैं। अपनी आवाज़ का इस्तेमाल उनके लिए आवाज़ उठाने के लिए करें—क्योंकि हर कविता में दलदलों और उससे भी आगे गूंजने की शक्ति होती है।.
यह महज एक प्रतियोगिता से कहीं अधिक है — यह उभयचर संरक्षण के लिए एक रचनात्मक आह्वान है!

कृपया प्रचार पत्रक डाउनलोड करें और साझा करें! भारतीय मेंढक की तस्वीर देवराज रॉय द्वारा ली गई है, जो 2024 SAVE THE FROGS! फोटो प्रतियोगिता का हिस्सा है।
प्रतियोगिता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी
भाग क्यों लें?
उभयचर जीव हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, फिर भी आवास विनाश, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण उन्हें गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से, हमारा उद्देश्य प्रकृति में उनकी भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सराहना को प्रेरित करना है। कविता लेखन प्रतिभागियों को उभयचर जीवों की सुंदरता, उनके आवासों और उनके अस्तित्व के लिए संघर्ष पर चिंतन करने का अवसर प्रदान करता है।.
क्या पुरस्कार दिए जाएंगे?
जी हां! उत्कृष्ट प्रविष्टियों को मिल सकते हैं…
🏅 उपलब्धि प्रमाण पत्र
🌍 SAVE THE FROGS! इंडिया की वेबसाइट और सोशल मीडिया
🎁 सर्वश्रेष्ठ कविताओं के लिए रोमांचक पुरस्कार
🐸 संरक्षण परियोजनाओं में योगदान करने के अवसर
कौन भाग ले सकता है?
यह प्रतियोगिता भारत में इन दो आयु वर्गों के किसी भी व्यक्ति के लिए खुली है:
✅ 12-17 वर्ष
✅ 18 वर्ष और उससे अधिक
महत्वपूर्ण तिथियां
🗓 आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि:
30 जून, 2025
🏆 परिणाम घोषणा:
31 जुलाई, 2025
जमा करने हेतु दिशा - निर्देश
📌 कविता 30 पंक्तियों से अधिक नहीं होनी चाहिए
📌 भाषा: कोई भी भारतीय क्षेत्रीय भाषा (क्षेत्रीय लिपि में लिखी जानी चाहिए)
📌 मौलिकता: कविता मौलिक होनी चाहिए, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित नहीं
📌 फोकस क्षेत्र: उभयचर संरक्षण, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और व्यक्तिगत कार्रवाई
इन नियमों का पालन करें!
• कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित सामग्री का उपयोग न करें:
कविता प्रतिभागी द्वारा स्वयं लिखी जानी चाहिए।
• साहित्यिक चोरी न करें:
पुस्तकों, लेखों, वेबसाइटों या अन्य स्रोतों से सामग्री की नकल न करें।
• धार्मिक सामग्री का उपयोग न करें:
कविता पर्यावरण संबंधी जिम्मेदारी और उभयचर संरक्षण पर केंद्रित होनी चाहिए।
• 30 पंक्तियों की सीमा: यह आपके लिए पर्याप्त होनी चाहिए!
निबंध प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए यहां क्लिक करें!
अपना निबंध यहाँ जमा करें। नियमों का पालन अवश्य करें। शुभकामनाएँ!


भारतीय मेंढक कला
आपकी कविता के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ!
यह प्रतियोगिता सिर्फ कविता तक सीमित नहीं है—यह उभयचरों के महत्व को समझने वाले व्यक्तियों की एक सेना तैयार करने के बारे में है। आइए, इन अद्भुत जीवों का सम्मान और संरक्षण करने के लिए मिलकर काम करें!






